संकट मोचन हनुमान मंदिर
हनुमान मंदिरभगवान हनुमान
समय
सुबह 5:00 - दोपहर 12:00, दोपहर 3:00 - रात 10:30 (मंगलवार और शनिवार मध्यरात्रि तक)
प्रवेश शुल्क
निःशुल्क
अवधि
30 मिनट - 1 घंटा
निकटतम घाट
विवरण
भारत के सबसे प्रतिष्ठित हनुमान मंदिरों में से एक, जिसकी स्थापना 16वीं शताब्दी में कवि-संत तुलसीदास ने की थी। यह मंदिर अपने निवासी बंदरों, दिव्य बेसन लड्डू प्रसाद और 1928 से चल रहे वार्षिक संकट मोचन संगीत समारोह के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के शांत बगीचे और प्राचीन बरगद के पेड़ व्यस्त शहर की सड़कों के बीच एक शांत आश्रय स्थल बनाते हैं।
आरती का समय
इतिहास
रामचरितमानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में इसकी स्थापना की थी। कहा जाता है कि उन्होंने इसी स्थान पर हनुमान की मूर्ति की खोज की थी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय ने 20वीं शताब्दी की शुरुआत में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया। संगीत समारोह की शुरुआत पंडित सामता प्रसाद ने 1928 में की थी। मंदिर परिसर में रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपियों का पुस्तकालय भी है।
महत्व
संकट मोचन का अर्थ है संकटों को हरने वाला। माना जाता है कि यहाँ के हनुमान विशेष रूप से भक्तों की बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करते हैं। यह मंदिर वाराणसी तीर्थ में चार मुख्य मंदिरों में से एक भी है।
वेशभूषा
सादे कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। अपना सामान सुरक्षित रखें — यहाँ के बंदर सामान छीनने के लिए बदनाम हैं।
सुझाव
- 1 मंगलवार या शनिवार को जाएँ जब मंदिर रात तक खुला रहता है।
- 2 बेसन लड्डू चढ़ाएँ — यह यहाँ हनुमान का पसंदीदा प्रसाद है।
- 3 अपने बैग, चश्मे और फोन सुरक्षित रखें — बंदर बहुत बहादुर और तेज़ होते हैं।
- 4 दुर्गा कुंड मंदिर के साथ संयोजित करें (5 मिनट की पैदल दूरी)।
- 5 शाम 7 बजे की आरती विशेष रूप से शक्तिशाली और संगीतमय है।
- 6 संगीत समारोह (मार्च–अप्रैल) एक शास्त्रीय संगीत महोत्सव है जिसे अवश्य देखें।
त्योहार
नाव से पहुँचें
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