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सारनाथ का धमेक स्तूप

दिन की यात्रा

सारनाथ — जहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया

वाराणसी से सिर्फ 10 किमी दूर सबसे पवित्र बौद्ध तीर्थ स्थल। 2,500 साल की कहानी पत्थरों में उकेरी — स्तूप, विश्व-प्रसिद्ध संग्रहालय और एशिया भर के मंदिर।

10 किमी
दूरी
3-4 घंटे
समय
6-10 AM
सबसे अच्छा समय
₹25
ASI प्रवेश
🕒 खुला: रोज़ सुबह 6 बजे – शाम 6 बजे 🏛️ संग्रहालय: 9 AM – 5 PM (शुक्रवार बंद) 🎟️ प्रवेश: भारतीय ₹25 / विदेशी ₹300 जल्दी पहुँचें — सुबह का समय सबसे अच्छा

सारनाथ के बारे में

बौद्ध धर्म का जन्मस्थल

सारनाथ (पालि में इसिपतन, संस्कृत में ऋषिपत्तन) दुनिया के चार सबसे पवित्र बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। 528 ई.पू. में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम — बोधगया में ज्ञान प्राप्त कर — यहाँ आए और अपने पाँच पूर्व साथियों को पहला उपदेश, धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त (धर्म चक्र प्रवर्तन) सुनाया। उसी एक प्रवचन से धर्म का पहिया घूमने लगा और बौद्ध संघ का जन्म हुआ।

अगले 1,500 वर्षों तक सारनाथ नालंदा के समकक्ष बौद्ध शिक्षा का केंद्र रहा। अशोक से लेकर गुप्त सम्राटों तक ने यहाँ स्तूप, स्तंभ और मठ बनवाए; चीन, तिब्बत और दक्षिण-पूर्व एशिया से तीर्थयात्री यहाँ अध्ययन करने आए। सारनाथ में जन्मी कला शैली ने सदियों तक बुद्ध की प्रतिमा-निर्माण को परिभाषित किया।

12वीं सदी में नष्ट और 1794 में फिर से खोजे गए सारनाथ में आज प्राचीन खंडहर, एक बेहतरीन संग्रहालय और जापान, थाईलैंड, म्यांमार, चीन, तिब्बत व श्रीलंका के जीवंत बौद्ध मंदिर साथ-साथ खड़े हैं।

सारनाथ की सिंह राजधानी
🦁
सिंह राजधानी
1905 में यहीं मिली — 1950 में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बनी

2,500 साल का इतिहास

सारनाथ की समयरेखा

528 ई.पू.

पहला उपदेश

बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध सारनाथ आए और पाँच साधुओं को धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त सुनाया — धर्म चक्र का पहला घुमाव।

249 ई.पू.

सम्राट अशोक का आगमन

अशोक ने धमेक स्तूप बनवाया, अशोक स्तंभ (सिंह राजधानी) स्थापित किया और यहाँ मठों की स्थापना की।

चौथी-छठी सदी

गुप्त काल का स्वर्ण युग

सारनाथ बौद्ध शिक्षा, कला और मूर्तिकला का विश्व-प्रसिद्ध केंद्र बना। सारनाथ शैली की बुद्ध मूर्तियाँ विकसित हुईं।

सातवीं सदी

ह्वेन त्सांग का विवरण

चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने यहाँ 1,500 भिक्षुओं और 300 फीट ऊँचे स्तूप का वर्णन किया।

12वीं सदी

विनाश

आक्रमणों में सारनाथ नष्ट हो गया और 600 साल तक यह स्थल दफन रहा।

1794

फिर से खोजा गया

काशी नरेश जगत सिंह ईंटों के लिए खुदाई कर रहे थे — उन्हें दफन धमेक स्तूप मिला।

1835

कनिंघम की खुदाई

अलेक्जेंडर कनिंघम ने पहली व्यवस्थित खुदाई कर मुख्य मंदिर, स्तूप और मठ प्रकाश में लाए।

1904-05

बड़ी खुदाई

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विशाल खुदाई में मठ परिसर का पूरा विस्तार सामने आया।

1931

मूलगंधकुति विहार

महाबोधि सोसाइटी ने आधुनिक मंदिर बनाया — जापानी कलाकार कोसेत्सु नोसु की प्रसिद्ध भित्तिचित्रों के साथ।

गैलरी

तस्वीरों में सारनाथ

धमेक स्तूप — बुद्ध के पहले उपदेश का स्थल
धमेक स्तूप — बुद्ध के पहले उपदेश का स्थल
हिरण उद्यान — सारनाथ का अर्थ ही "हिरण उद्यान" है
हिरण उद्यान — सारनाथ का अर्थ ही "हिरण उद्यान" है
अशोक स्तंभ (तीसरी सदी ई.पू.), सारनाथ
अशोक स्तंभ (तीसरी सदी ई.पू.), सारनाथ
सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय — भारत के सबसे पुराने संग्रहालयों में
सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय — भारत के सबसे पुराने संग्रहालयों में
वाट थाई सारनाथ — सुनहरे चैती वाला थाई मंदिर
वाट थाई सारनाथ — सुनहरे चैती वाला थाई मंदिर
मूलगंधकुति विहार में बुद्ध प्रतिमा
मूलगंधकुति विहार में बुद्ध प्रतिमा

क्या देखें

सारनाथ के प्रमुख आकर्षण

धमेक स्तूप
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धमेक स्तूप

128 फीट ऊँचा स्तूप, अशोक (249 ई.पू.) द्वारा बनवाया और गुप्त काल में विस्तारित। फूलों की नक्काशी और ज्यामितीय पट्टियाँ। परिक्रमा करें जैसे श्रद्धालु 2,500 सालों से करते आए हैं।

1 घंटा ₹25 टिकट में शामिल
अशोक स्तंभ
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अशोक स्तंभ

स्तंभ का टूटा हिस्सा अपनी जगह खड़ा है — लेकिन विश्व-प्रसिद्ध सिंह राजधानी अब सारनाथ संग्रहालय में है। 1950 में यह भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना।

20 मिनट मुफ्त
सारनाथ संग्रहालय
🏛️

सारनाथ संग्रहालय

1910 में खुला भारत का सबसे पुराना स्थल संग्रहालय। मूल सिंह राजधानी, सारनाथ शैली की बुद्ध मूर्तियाँ और सदियों की मूर्तिकला यहाँ प्रदर्शित है।

1.5 घंटे ₹25 (भारतीय), ₹300 (विदेशी)
मूलगंधकुति विहार
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मूलगंधकुति विहार

महाबोधि सोसाइटी का आधुनिक बौद्ध मंदिर (1931)। जापानी कलाकार कोसेत्सु नोसु की शानदार भित्तिचित्रें 22 पैनलों में बुद्ध के जीवन की कथा कहती हैं।

45 मिनट मुफ्त
चौखंडी स्तूप
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चौखंडी स्तूप

ऊँचे टीले पर अष्टकोणीय ईंट स्तूप — जहाँ बुद्ध ने सारनाथ आते समय पाँच शिष्यों से पहली बार मुलाकात की। ऊपर का मुगल टॉवर 1588 में अकबर ने जोड़ा था।

30 मिनट मुफ्त
जापानी मंदिर (निप्पोनज़न म्योहोजी)
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जापानी मंदिर (निप्पोनज़न म्योहोजी)

सुनहरे बुद्ध, ध्यान उद्यान और सुबह के मंत्रोच्चार वाला शांत जापानी शैली का मंदिर। निप्पोनज़न-म्योहोजी संप्रदाय द्वारा निर्मित।

30 मिनट मुफ्त
वाट थाई सारनाथ
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वाट थाई सारनाथ

सुनहरे चैती (स्तूप), चमकीले रंगों वाली दीवारों और बड़ी बुद्ध प्रतिमा वाला भव्य थाई मंदिर — कुछ पलों के लिए थाईलैंड पहुँच जाएँ।

20 मिनट मुफ्त
हिरण उद्यान और मठ खंडहर
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हिरण उद्यान और मठ खंडहर

उस पार्क में टहलें जहाँ हिरण आज भी विचरण करते हैं — सारनाथ नाम "सारंगनाथ" से आया है। 1,500 भिक्षुओं वाले मठों के खंडहर देखें।

45 मिनट मुफ्त
सारनाथ संग्रहालय में सिंह राजधानी

मत चूकिए

सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय

भारत के सबसे पुराने स्थल संग्रहालयों में से एक (स्थापना 1910)। यहाँ मूल अशोक सिंह राजधानी, सारनाथ शैली की प्रसिद्ध बुद्ध मूर्तियाँ — जिनमें शांत "पहला उपदेश" बुद्ध भी है — और मौर्य से मध्यकाल तक की मूर्तियाँ प्रदर्शित हैं।

  • अशोक की सिंह राजधानी — भारत का राष्ट्रीय प्रतीक (मुख्य गैलरी)
  • "बुद्ध का पहला उपदेश" — सारनाथ शैली की बेजोड़ कृति
  • सैकड़ों पत्थर की मूर्तियाँ, अभिलेख और रोज़मर्रा के अवशेष
  • संग्रहालय बुकशॉप — बौद्ध कला की गाइड उपलब्ध
🕒9:00 AM – 5:00 PM · शुक्रवार बंद · ₹25 / ₹300

एक पार्क में पूरी दुनिया

अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध मंदिर

एशिया भर के बौद्ध समुदायों ने सारनाथ परिसर के आसपास मंदिर बनाए हैं — हर एक आपको किसी दूसरे देश की छोटी यात्रा पर ले जाता है।

🇯🇵

जापानी मंदिर

सुनहरा बुद्ध, सुबह का मंत्रोच्चार

🇹🇭

वाट थाई

सुनहरा चैती, थाई भित्तिचित्र

🇲🇲

म्यांमार मंदिर

औपनिवेशिक काल की बर्मी वास्तुकला

🇨🇳

चीनी मंदिर

पगोडा शैली का रंगीन हॉल

🇱🇰

श्रीलंकाई मंदिर

प्राचीन मठ खंडहरों पर निर्मित

🇹🇷

तिब्बती मंदिर

प्रार्थना झंडे और मणि चक्र

🇰🇷

कोरियाई मंदिर

बौद्ध अध्ययन केंद्र

🇲🇳

मंगोलियाई मठ

परिसर का नवीनतम मठ

कैसे पहुँचें

सारनाथ कैसे पहुँचें

🛺

ऑटो-रिक्शा

सबसे आम विकल्प। दशाश्वमेध या गोदौलिया से ₹150-200। 25-35 मिनट लगते हैं। बैठने से पहले किराया तय कर लें।

अकेले यात्रियों के लिए
🚕

टैक्सी / कैब

शहर से ₹250-400। वाराणसी में उबर और ओला चलते हैं — ऐप किराया तय होता है और एसी से सवारी आरामदायक होती है।

परिवार के लिए
🚌

लोकल बस

वाराणसी कैंट और चौकाघाट से हर 10-15 मिनट में बीएसआरटीसी बसें सारनाथ जाती हैं। किराया सिर्फ ₹10-15। 40-50 मिनट लगते हैं।

सबसे सस्ता
🛥️

नाव + ऑटो कॉम्बो

दशाश्वमेध घाट से सूर्योदय नाव से वरुणा संगम तक, फिर ऑटो से शेष 6 किमी। फोटोग्राफरों का पसंदीदा।

सबसे खूबसूरत

अपनी यात्रा की योजना

आधे दिन का सारनाथ कार्यक्रम

सूर्योदय की नाव सवारी से शुरू करें — यह क्लासिक वाराणसी + सारनाथ कॉम्बो है।

5:30 AM

दशाश्वमेध घाट से गंगा में नाव की सवारी। सूरज उगने के साथ घाट जागते देखें।

7:00 AM

सारनाथ पहुँचें। ASI स्थल में प्रवेश — सुबह की कोमल रोशनी में सीधे धमेक स्तूप।

7:45 AM

स्तूप की परिक्रमा करें, फिर अशोक स्तंभ और खुदाई वाले मठ खंडहर देखें।

8:30 AM

चौखंडी स्तूप (10 मिनट दूर) तक पैदल जाएँ, फिर संग्रहालय की लाइन में।

9:00 AM

संग्रहालय खुलता है। मूल सिंह राजधानी और सारनाथ शैली के बुद्ध देखें।

10:15 AM

मूलगंधकुति विहार — भित्तिचित्रों को निहारें और प्रार्थना सभा में कुछ शांत पल बिताएँ।

10:45 AM

हिरण उद्यान में टहलें, फिर जापानी और थाई मंदिरों में फोटो खींचें।

12:00 PM

प्रवेश द्वार के पास रेस्तरां में दोपहर का भोजन, फिर वाराणसी लौटें।

सारनाथ यात्रा के टिप्स

सुबह जल्दी (6-8 बजे) जाएँ — भीड़ और गर्मी से बचें, धमेक स्तूप पर रोशनी भी शानदार होती है

प्रवेश द्वार पर लाइसेंसशुदा गाइड रखें ₹200-400 — वे 2,500 साल का इतिहास जीवंत कर देते हैं

संग्रहालय शाम 5 बजे बंद होता है और शुक्रवार को बंद रहता है — दोपहर में पहुँचें तो पहले इसे देखें

पानी और आरामदायक जूते ले जाएँ — परिसर में 3-4 किमी चलना पड़ता है

सिंह राजधानी संग्रहालय के अंदर है — इसे मत चूकिए, यह भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है

सारनाथ का अर्थ है "हिरण उद्यान" — हिरण उद्यान को मत छोड़िए, हिरण मिलनसार होते हैं

स्मारकों पर फोटो की अनुमति है, पर संग्रहालय की कुछ चीज़ों पर रोक है

सारनाथ को गंगा आरती के साथ जोड़ें — शाम 5 बजे तक लौटें और सीधे दशाश्वमेध जाएँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सारनाथ वाराणसी से कितनी दूर है?
सारनाथ वाराणसी शहर के केंद्र से लगभग 10 किमी उत्तर-पूर्व में है। ऑटो-रिक्शा से 25-35 मिनट, टैक्सी से 20-25 मिनट लगते हैं। सड़क अच्छी है।
सारनाथ का समय क्या है?
पुरातत्व क्षेत्र सूर्योदय से सूर्यास्त तक (लगभग सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे) खुला है। संग्रहालय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक और शुक्रवार को बंद रहता है। मंदिर आमतौर पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहते हैं। सुबह जल्दी जाना सबसे अच्छा है।
क्या सारनाथ में प्रवेश शुल्क है?
ASI मुख्य स्थल (धमेक स्तूप क्षेत्र) पर भारतीयों के लिए ₹25 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹300 शुल्क है। संग्रहालय का अलग टिकट ₹25/₹300 है। चौखंडी स्तूप, विहार और अंतर्राष्ट्रीय मंदिर मुफ्त हैं।
सारनाथ के लिए कितना समय चाहिए?
मुख्य स्थल, संग्रहालय और मूलगंधकुति विहार देखने के लिए 3-4 घंटे दें। सभी अंतर्राष्ट्रीय मठ देखने हों तो 1-2 घंटे और जोड़ें। आधा दिन आदर्श है।
क्या सारनाथ को वाराणसी दर्शन के साथ जोड़ा जा सकता है?
हाँ! अधिकांश आगंतुक सुबह (6-12 बजे) सारनाथ जाते हैं और दोपहर में घाट देखकर शाम 6 बजे दशाश्वमेध की गंगा आरती में शामिल होते हैं।
क्या सारनाथ में कपड़ों का कोड है?
सख्त नियम नहीं है, लेकिन सम्मानजनक कपड़े पहनें, खासकर मंदिरों में। मंदिर में प्रवेश से पहले जूते उतारें। बहुत चलना पड़ता है, आरामदायक जूते पहनें।
क्या सारनाथ बच्चों के साथ जाने लायक है?
बिल्कुल। हिरण उद्यान बच्चों को बहुत पसंद आता है, स्तूप नज़दीक से प्रभावशाली है और संग्रहालय की मूर्तियाँ रोचक हैं। खेलने के लिए खुली जगह भी भरपूर है।
क्या सारनाथ में गाइड मिलते हैं?
हाँ, मुख्य प्रवेश द्वार पर लाइसेंसशुदा गाइड मिलते हैं। 1-2 घंटे के दौरे के लिए ₹200-400 लगते हैं। बौद्ध इतिहास की जानकारी के लिए यह पैसा वसूल है।

सारनाथ जाने से पहले नाव बुक करें

गंगा पर सूर्योदय नाव सवारी से दिन की शुरुआत करें, फिर सारनाथ चलें। NaviX इसे आसान बनाता है।

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