दुर्गा कुंड मंदिर
शक्ति पीठदेवी दुर्गा
समय
5:00 AM - 9:00 PM
प्रवेश शुल्क
Free
अवधि
30 minutes - 1 hour
निकटतम घाट
विवरण
18वीं शताब्दी में बंगाल की नटोर की रानी भवानी द्वारा निर्मित एक भव्य शक्ति पीठ मंदिर, जो तेज लाल रंग में रंगा हुआ है। इस मंदिर में देवी दुर्गा की स्वयंभू मूर्ति है। मंदिर के बगल में पवित्र दुर्गा कुंड (तालाब) है, जिससे इस मंदिर का नाम पड़ा। बड़ी संख्या में बंदरों के कारण इसे बंदर मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर की विशिष्ट नागर शैली की वास्तुकला पूरे मोहल्ले में एक दृश्य स्थल बनाती है।
आरती का समय
इतिहास
18वीं शताब्दी में बंगाल की नटोर की रानी भवानी ने इसका निर्माण किया था, जो देवी दुर्गा की भक्त थीं। मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है। बगल का दुर्गा कुंड भी रानी भवानी ने भक्तों के पूजा से पहले स्नान के लिए बनवाया था। मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार किया गया, 20वीं शताब्दी की शुरुआत में स्थानीय धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा महत्वपूर्ण पुनर्स्थापना कार्य किया गया।
महत्व
51 शक्ति पीठों में से एक जहाँ सती के शरीर के अंग गिरे माने जाते हैं। स्वयंभू मूर्ति इसे विशेष रूप से पवित्र बनाती है। बगल का दुर्गा कुंड अनुष्ठानिक स्नान के लिए गंगा जितना पवित्र माना जाता है।
वेशभूषा
Modest traditional attire. Only Hindus are allowed inside the inner sanctum.
सुझाव
- 1 इस मंदिर को बंदर मंदिर भी कहा जाता है — भोजन और सामान सुरक्षित रखें।
- 2 नवरात्रि के दौरान जाएँ सबसे भव्य उत्सव और सजावट के लिए।
- 3 गैर-हिंदू गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकते लेकिन बाहर से वास्तुकला देख सकते हैं।
- 4 संकट मोचन मंदिर के साथ संयोजित करें — दोनों पैदल दूरी पर हैं।
- 5 लाल नागर शैली की वास्तुकला शानदार फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त है।
- 6 सुबह जल्दी जाने से भीड़ आने से पहले शांत अनुभव मिलता है।
त्योहार
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