काल भैरव मंदिर
शिव मंदिरभगवान काल भैरव
समय
5:00 AM - 1:30 PM, 3:00 PM - 10:00 PM
प्रवेश शुल्क
Free
अवधि
20 - 30 minutes
निकटतम घाट
विवरण
काशी का कोतवाल (रक्षक)। कपालों की माला और चांदी के चेहरे वाली भगवान शिव की इस उग्र प्रतिमा का नाम काल भैरव है। बिना उनकी अनुमति के कोई काशी में प्रवेश या निकल नहीं सकता। भक्तों को सुरक्षा के लिए काला धागा (गंडा) दिया जाता है। मंदिर की भव्य उपस्थिति और अनूठे अनुष्ठान इसे वाराणसी के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक रूप से तीव्र मंदिरों में से एक बनाते हैं।
आरती का समय
इतिहास
यह मंदिर प्राचीन काल का है। कपालों की माला वाली चांदी के चेहरे वाली प्रतिमा काल भैरव की है। यह मंदिर अपनी अनूठी चढ़ावों के लिए प्रसिद्ध है — भक्त शराब और तिल का तेल चढ़ाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काल भैरव की रचना शिव ने शहर की रक्षा करने और काशी में धर्म का उल्लंघन करने वालों को दंडित करने के लिए की थी।
महत्व
काल भैरव काशी के कोतवाल (पुलिस प्रमुख) हैं। माना जाता है कि उनकी अनुमति के बिना कोई वाराणसी में नहीं रह सकता या नहीं जा सकता। यहाँ दिया गया काला धागा बुरी शक्तियों से सुरक्षा के लिए पहना जाता है।
वेशभूषा
Modest traditional attire.
सुझाव
- 1 काल भैरव के दर्शन के लिए रविवार सबसे शुभ दिन है।
- 2 यहाँ अनूठा प्रसाद मिलता है — शराब और तिल का तेल चढ़ाया जाता है।
- 3 यहाँ दिया गया काला धागा (गंडा) सुरक्षा के लिए पहनें।
- 4 दशाश्वमेध घाट के दौरे के साथ संयोजित करें — मंदिर नजदीक है।
- 5 कपालों की माला वाली चांदी की प्रतिमा बहुत प्रभावशाली है।
- 6 शाम 7 बजे की आरती के दौरान जाएँ सबसे शक्तिशाली अनुभव के लिए।
त्योहार
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