3000+ वर्षों की सभ्यता
वाराणसी का इतिहास
प्राचीन काशी से लेकर आधुनिक भारत की आध्यात्मिक राजधानी तक — हजारों वर्षों की यात्रा।
प्राचीन उत्पत्ति (3000 ईसा पूर्व – 500 ई)
वाराणसी, जिसे प्राचीन काल में काशी के नाम से जाना जाता था, पृथ्वी पर सबसे पुराने निरंतर बसे शहरों में से एक है। पुरातात्विक साक्ष्य 1100 ईसा पूर्व से बस्ती का संकेत देते हैं। शहर का उल्लेख ऋग्वेद, बौद्ध और जैन ग्रंथों में मिलता है।
गुप्त साम्राज्य (4वीं-6वीं शताब्दी ई) के दौरान, वाराणसी शिक्षा, कला और धर्म का केंद्र बन गया। शहर हिंदू, बौद्ध और जैन विद्वानों का केंद्र था।
मध्यकालीन काल (500 – 1700 ई)
मध्यकाल में वाराणसी दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के शासन में रहा। आक्रमणों के बावजूद, शहर ने अपना आध्यात्मिक महत्व बनाए रखा। मुगल सम्राट अकबर ने शहर को संरक्षण दिया, और बाद में औरंगजेब ने 1669 में मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया।
मराठा साम्राज्य के प्रभाव से हिंदू संस्कृति का पुनरुत्थान हुआ। बनारस घराने की संगीत परंपरा इस काल में स्थापित हुई। वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण इंदौर की रानी अहिल्याबाई होलकर ने 1780 में करवाया था।
औपनिवेशिक काल और आधुनिक वाराणसी
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान, वाराणसी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बन गया। 1916 में स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) राष्ट्रीय शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया। आज वाराणसी यूनेस्को विश्व धरोहर शहर के रूप में खड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वाराणसी कितनी पुरानी है?
प्राचीन काल में वाराणसी को क्या कहा जाता था?
वाराणसी पर किस राजवंश ने सबसे लंबे समय तक शासन किया?
वाराणसी की स्थापना कब हुई थी?
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वही सड़कें जिन पर 3,000 वर्षों से लोग चलते आ रहे हैं।
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