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धमेख स्तूप सारनाथ

जहाँ धर्मचक्र पहली बार घूमा

सारनाथ क्षेत्र

बौद्ध शिक्षाओं का जन्म स्थल — प्राचीन स्तूप, भारत का राष्ट्रीय प्रतीक और हर बौद्ध देश के मठ, वाराणसी से सिर्फ 10 किमी दूर।

10 किमी
वाराणसी से
528 ई.पू.
प्रथम उपदेश
43.6 मी
धमेख स्तूप
₹25
प्रवेश शुल्क
🕒 साइट: सूर्योदय – सूर्यास्त · संग्रहालय: 9 – 5 बजे 🎟️ साइट ₹25 · संग्रहालय ₹25 📅 संग्रहालय शुक्रवार बंद 🚌 वाराणसी से 10 किमी

क्षेत्र का परिचय

बौद्ध धर्म का पालना

सारनाथ (प्राचीन मृगदाव — हिरण उद्यान) वह स्थान है जहाँ बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने 528 ई.पू. में अपने पाँच पूर्व साथियों को अपना पहला उपदेश — धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त — दिया था। उसी क्षण धर्म का चक्र घूमा और सारनाथ बौद्ध तीर्थ स्थलों में सबसे पवित्र चार स्थानों में से एक बन गया।

इसके इर्द-गिर्द बसी बस्ती एक समृद्ध मठवासी विश्वविद्यालय बन गई जिसे अशोक और उत्तराधिकारी राजवंशों ने एक सहस्राब्दी से अधिक समय तक संरक्षण दिया। 12वीं शताब्दी में विनाश के बाद खंडहर दबे रहे, जब तक 1790 के दशक में पुरातत्वविदों ने इन्हें फिर से खोजा और 1900 की शुरुआत में उत्खनन किया।

आज सारनाथ क्षेत्र एक जीवंत बौद्ध केंद्र है — खंडहरों, संग्रहालयों और थाईलैंड, जापान, म्यांमार, तिब्बत आदि देशों द्वारा निर्मित मठों का शांत, वृक्षों से घिरा नगर, जहाँ केसरिया वस्त्रधारी भिक्षु उन्हीं रास्तों पर चलते हैं जिन पर स्वयं बुद्ध चले थे।

हिरण उद्यान सारनाथ
🛕
मृगदाव — हिरण उद्यान
जहाँ 528 ई.पू. में पहला उपदेश दिया गया

चित्र दीर्घा

तस्वीरों में सारनाथ

43.6 मीटर ऊँचा धमेख स्तूप - जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया
43.6 मीटर ऊँचा धमेख स्तूप - जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया
अशोक स्तंभ - भारत के राष्ट्रीय प्रतीक की प्रेरणा
अशोक स्तंभ - भारत के राष्ट्रीय प्रतीक की प्रेरणा
मूल सिंह शीर्ष, सारनाथ संग्रहालय
मूल सिंह शीर्ष, सारनाथ संग्रहालय
चौखंडी स्तूप - बुद्ध का अपने पहले शिष्यों से मिलन स्थल
चौखंडी स्तूप - बुद्ध का अपने पहले शिष्यों से मिलन स्थल
हिरण उद्यान - शांत मृगदाव
हिरण उद्यान - शांत मृगदाव
मूलगंध कुटी विहार में स्वर्ण बुद्ध प्रतिमा
मूलगंध कुटी विहार में स्वर्ण बुद्ध प्रतिमा

अवश्य देखें

सारनाथ के प्रमुख स्थल

धमेख स्तूप

धमेख स्तूप

30-45 मिनट निःशुल्क (साइट टिकट)

पहले उपदेश का सटीक स्थान चिह्नित करने वाला 43.6 मीटर का विशाल स्तूप। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित और सदियों में विस्तारित, इसकी नक्काशीदार पत्थर की अंगूठियाँ गुप्त काल की उत्कृष्ट कला हैं।

अशोक स्तंभ एवं सिंह शीर्ष

अशोक स्तंभ एवं सिंह शीर्ष

20 मिनट निःशुल्क

तीसरी शताब्दी ई.पू. का टूटा हुआ स्तंभ एक बार 15 मीटर ऊँचा था। इसका चार सिंहों वाला शीर्ष — अब संग्रहालय में — 1950 में भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय प्रतीक बना।

पुरातत्व संग्रहालय

पुरातत्व संग्रहालय

1-1.5 घंटे ₹25

भारत का सबसे पुराना साइट संग्रहालय (1910)। यहाँ मूल सिंह शीर्ष, बोधिसत्व की प्रतिमा और प्रसिद्ध बैठे बुद्ध की मूर्तियाँ हैं — मौर्य से मध्यकाल तक की उत्कृष्ट कृतियाँ।

चौखंडी स्तूप

चौखंडी स्तूप

15 मिनट निःशुल्क

ऊँचे चबूतरे पर बना पाँचवीं शताब्दी का अष्टकोणीय स्तूप, जिसके ऊपर मुगलकालीन मीनार है। यह बोधगया से आते समय बुद्ध के अपने पहले पाँच शिष्यों से मिलने का स्थल है।

मूलगंध कुटी विहार

मूलगंध कुटी विहार

30 मिनट निःशुल्क

1931 में बना मंदिर जिसमें बुद्ध के जीवन को दर्शाते कोसुत्सु नोसु के अद्भुत भित्ति चित्र, स्वर्ण बुद्ध प्रतिमा और बोधगया के मूल बोधि वृक्ष का पौधा है।

हिरण उद्यान (मृगदाव)

हिरण उद्यान (मृगदाव)

20 मिनट निःशुल्क

हरित विस्तार जिसने इस क्षेत्र को इसका प्राचीन नाम दिया। यहाँ आज भी हिरण विचरते हैं — बुद्ध के पहले प्रवचन का यही दृश्य था।

एक जगह पूरा विश्व

अंतरराष्ट्रीय मंदिर

🇹🇭 थाईलैंड

वाट थाई सारनाथ

वाट थाई सारनाथ

स्वर्ण घुमावदार छतों वाला सुंदर थाई मठ, पारंपरिक थाई शैली में निर्मित और सक्रिय विहार।

🇯🇵 जापान

जापानी मंदिर

जापानी मंदिर

अपने प्रतिष्ठित सफेद पैगोडा के साथ निप्पोंज़ान म्योहोजी मंदिर — सारनाथ की सबसे फोटोजेनिक इमारत।

🇱🇰 श्रीलंका

श्रीलंकाई विहार

श्रीलंकाई बौद्ध समुदाय द्वारा निर्मित सरल, शांत विहार।

🇲🇲 म्यांमार

म्यांमार (बर्मी) मंदिर

सुसज्जित स्वर्ण विवरणों के साथ पारंपरिक बर्मी वास्तुकला।

🇹🇼 ताइवान

ताइवानी मंदिर

ताइवानी बौद्ध परंपराओं को दर्शाती चीनी शैली की मंदिर।

🇰🇷 कोरिया

कोरियाई विहार

ध्यान सुविधाओं के साथ आधुनिक कोरियाई बौद्ध केंद्र।

🇨🇳 चीन

चीनी मंदिर

साइट के पास चीनी महायान मंदिर परिसर।

🇳🇵 नेपाल

नेपाली मंदिर

नेपाली बौद्ध विरासत को दर्शाता हिमालयी शैली का मंदिर।

वहाँ कैसे पहुँचें

सारनाथ कैसे पहुँचें

🛺

ऑटो-रिक्शा

गोदौलिया या कैंट से: ₹150-250, 30-40 मिनट। शुरू करने से पहले किराया तय कर लें।

सबसे आम
🚌

सिटी बस

वाराणसी कैंट और गोदौलिया से सारनाथ। ₹10-15। सारनाथ जंक्शन स्टॉप साइट से 5 मिनट दूर है।

सबसे सस्ता
🚕

टैक्सी / कैब

शहर में कहीं से भी उबर/ओला। ₹300-500 एक तरफ। रुकने के साथ राउंड ट्रिप आसानी से तय होती है।

आरामदायक
🛺

साझा रिक्शा

कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र से साझा टेंपो — बहुत सस्ता, थोड़ा भीड़भाड़ वाला।

बजट

आधे दिन की योजना

सही सुबह की यात्रा कार्यक्रम

7:00 पूर्वाह्न

वाराणसी से प्रस्थान — ऑटो या कैब से सारनाथ

7:45 पूर्वाह्न

पुरातत्व साइट में प्रवेश — पहले धमेख स्तूप देखें

8:45 पूर्वाह्न

अशोक स्तंभ और प्राचीन मठों के खंडहर

9:30 पूर्वाह्न

सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय (9 बजे खुलता है, शुक्रवार बंद)

10:30 पूर्वाह्न

मूलगंध कुटी विहार — भित्ति चित्र और स्वर्ण बुद्ध

11:00 पूर्वाह्न

हिरण उद्यान में सैर, जापानी और थाई मंदिर देखें

12:00 मध्याह्न

सारनाथ के छत वाले कैफे में दोपहर का भोजन

1:00 अपराह्न

वाराणसी वापसी — दशाश्वमेध में शाम की आरती की तैयारी

सारनाथ घूमने के सुझाव

जल्दी निकलें — सारनाथ शहर के केंद्र से 40 मिनट की दूरी पर है

साइट सूर्योदय पर खुलती है (टिकट काउंटर खुलने तक निःशुल्क) — सुबह का दृश्य शांत होता है

संयोजित टिकट: साइट ₹25, संग्रहालय ₹25, कैमरा शुल्क अलग

संग्रहालय शुक्रवार को बंद रहता है — योजना उसी अनुसार बनाएँ

आरामदायक जूते पहनें — खंडहरों के बीच काफी पैदल चलना होगा

मंदिरों में भिक्षु ध्यान कर रहे हैं — आवाज कम रखें

गेट पर प्रमाणित गाइड ₹300-500 में लें — यहाँ का इतिहास समृद्ध है

बुद्ध पूर्णिमा (मई) पर जाएँ — पूरा क्षेत्र त्योहार की भव्यता में होता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारनाथ क्षेत्र क्या है?
सारनाथ क्षेत्र वाराणसी से 10 किमी उत्तर-पूर्व में एक शांत बस्ती है, जो उस बौद्ध पुरातत्व स्थल के इर्द-गिर्द बसी है जहाँ बुद्ध ने 528 ई.पू. में अपना पहला उपदेश दिया था। इसमें धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ, पुरातत्व संग्रहालय और बौद्ध देशों के दर्जनों मठ शामिल हैं।
सारनाथ के खुलने का समय क्या है?
पुरातत्व साइट सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुली रहती है (टिकट काउंटर लगभग 7 पूर्वाह्न – 5 अपराह्न)। सारनाथ संग्रहालय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है, शुक्रवार और सार्वजनिक अवकाश पर बंद।
प्रवेश शुल्क कितना है?
पुरातत्व साइट का शुल्क भारतीयों के लिए ₹25 (15 वर्ष से कम बच्चों के लिए निःशुल्क) और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹300 है। संग्रहालय का अतिरिक्त ₹25 (भारतीय) / ₹300 (विदेशी) शुल्क है। कैमरा शुल्क अलग से लगता है।
कितना समय चाहिए?
केंद्रित यात्रा में 3-4 घंटे लगते हैं: साइट पर 1.5 घंटे, संग्रहालय में 1 घंटा, और मंदिरों तथा हिरण उद्यान के लिए 1 घंटा। भोजन के साथ आराम से घूमने के लिए 4-5 घंटे रखें।
सारनाथ में खाने की व्यवस्था है?
हाँ — सारनाथ की मुख्य सड़क पर कई रेस्तरां और छत वाले कैफे हैं जहाँ भारतीय, चीनी और कॉन्टिनेंटल भोजन मिलता है, साथ ही मंदिरों के पास लोकप्रिय थाई भोजनालय भी हैं। अधिकांश बजट-अनुकूल हैं।
क्या सारनाथ में रात रुक सकते हैं?
हाँ, साइट के आसपास कुछ बजट होटल, गेस्ट हाउस और बौद्ध धर्मशालाएँ हैं। यहाँ रुकना वाराणसी के पुराने शहर का शांत विकल्प है — विशेषकर ध्यान करने वालों के लिए।
क्या गाइड उपलब्ध हैं?
हाँ, साइट प्रवेश द्वार के पास खंडहरों और मंदिरों के भ्रमण के लिए प्रमाणित गाइड ₹300-500 में मिलते हैं। संग्रहालय में कई भाषाओं में ऑडियो गाइड है।
घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से मार्च आदर्श है — खंडहरों में पैदल चलने के लिए सुखद मौसम। बुद्ध पूर्णिमा (अप्रैल-मई) और लोसार उत्सव के समय भीड़ और भव्यता होती है। वर्ष के किसी भी दिन सुबह (7-10 बजे) सबसे अच्छा समय है।

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