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त्योहार गाइड

वाराणसी में मकर संक्रांति: गंगा पर फसल उत्सव

पतंग, पवित्र स्नान और पारंपरिक मिठाइयों के साथ सूर्य के संक्रमण का जश्न मनाएं

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश की खगोलीय घटना को चिह्नित करती है, जो सर्दियों के संक्रमण और लंबे दिनों की शुरुआत का संकेत देती है। वाराणसी में, यह आकाशीय घटना विशेष महत्व रखती है क्योंकि हजारों लोग गंगा के पवित्र तट पर एकत्रित होते हैं।

त्योहार को उत्तरायण भी कहा जाता है, जो सूर्य की उत्तरी यात्रा का प्रतीक है।

वाराणसी में उत्सव

दिन की शुरुआत सूर्योदय के समय गंगा में पवित्र स्नान से होती है, जो पापों को धोता है और सौभाग्य लाता है। पतंग उड़ाना एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें आकाश विभिन्न आकार और रंगों की पतंगों से भर जाता है।

तिल-गुल (तिल और गुड़ की मिठाई) पारंपरिक व्यंजन है जो एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान किया जाता है।

सर्वोत्तम अनुभव और टिप्स

पतंग उड़ाने के लिए अस्सी घाट पर जाएं जहां स्थानीय लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। संक्रांति के दौरान शाम की आरती विशेष रूप से सुंदर होती है। पारंपरिक तिल-गुल का स्वाद लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि (मकर) में प्रवेश और फसल मौसम की शुरुआत को चिह्नित करती है। इसे पवित्र स्नान, पतंग उड़ाने और तिल-गुल (तिल और गुड़ की मिठाई) बांटने के साथ मनाया जाता है।
मकर संक्रांति के दौरान क्या विशेष भोजन तैयार किया जाता है?
तिल-गुल (तिल और गुड़ की मिठाई) मकर संक्रांति पर बांटी जाने वाली पारंपरिक मिठाई है। अन्य लोकप्रिय व्यंजनों में घी, पूरन पोली और विभिन्न तिल-आधारित मिठाइयां शामिल हैं।

वाराणसी में मकर संक्रांति मनाएं

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