वाराणसी मृत्यु और मुक्ति से अद्वितीय रूप से जुड़ी है। हिंदू मानते हैं कि यहाँ मरना मोक्ष देता है।
मुख्य बिंदु
- मोक्ष की अवधारणा
- मणिकर्णिका घाट
- हरिश्चंद्र घाट
- शिष्टाचार और सम्मान
मोक्ष की अवधारणा
हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान शिव वाराणसी में मरने वालों के कानों में तारक मंत्र फुसफुसाते हैं।
मणिकर्णिका घाट
भगवान शिव द्वारा प्रज्वलित अनंत ज्वाला वाला प्राथमिक श्मशान घाट। हर दिन चौबीसों घंटे दाह संस्कार होते हैं।
हरिश्चंद्र घाट
राजा हरिश्चंद्र के नाम पर रखा गया, यह घाट मणिकर्णिका से पुराना है और विद्युत शवदाह गृह प्रदान करता है।
शिष्टाचार और सम्मान
फोटोग्राफी सख्त वर्जित है। जूते उतारें, सादा कपड़ा पहनें, मौन रखें, और कभी पैर चिता या नदी की ओर न रखें।
त्वरित सुझाव
मणिकर्णिका 24/7 संचालित होता है। फोटोग्राफी सख्त वर्जित है। पूर्ण सम्मान दिखाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशेष रूप से वाराणसी में क्यों?
हिंदू विश्वास है कि भगवान शिव काशी में मरने वालों को मुक्ति देते हैं।
रोजाना कितने अंतिम संस्कार?
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र पर मिलाकर रोजाना लगभग 80 से 200।
क्या पर्यटक जा सकते हैं?
हाँ, लेकिन अत्यधिक सम्मान बनाए रखें। फोटो न लें।
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