सूर्यास्त के बाद वाराणसी टिमटिमाते तेल के दीपकों, गूँजते मंदिर की घंटियों और गंगा की मधुर ध्वनि का एक रहस्यमय शहर बन जाता है।
मुख्य बिंदु
- अंधेरे के बाद घाट
- रात्रि पैदल यात्रा पर प्रमुख स्थान
- रात का खाना दृश्य
- रात्रि पैदल यात्रा के लिए सुरक्षा सुझाव
अंधेरे के बाद घाट
घाट रात में बिल्कुल अलग चरित्र लेते हैं। तेल के दीपकों से धुंधली रोशनी में, सीढ़ियाँ गंगा के अंधेरे पानी की ओर जाती हैं।
रात्रि पैदल यात्रा पर प्रमुख स्थान
दशाश्वमेध घाट से शुरू करें। संकरी गलियों में अस्सी घाट की ओर चलें। काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में रुकें।
आरती के बाद दशाश्वमेध
आरती समाप्त होने के बाद, घाट शांत हो जाता है। सीढ़ियों पर बैठें और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस करें।
रोशनी से सजी गलियाँ
पुराने शहर की गलियाँ लाइट स्ट्रिंग्स और पारंपरिक दीपकों से रोशन हैं। खाने के स्टॉल और चाय की दुकानें देर तक खुली रहती हैं।
रात में मंदिर घंटियाँ
संकरी गलियों में गूँजती मंदिर घंटियों की आवाज एक परलोकीय वातावरण बनाती है।
रात का खाना दृश्य
पुराने शहर रात में गर्म कचौरियाँ, चाय और मिठाइयाँ परोसने वाले खाने के स्टॉल के साथ जीवंत रहता है।
रात्रि पैदल यात्रा के लिए सुरक्षा सुझाव
समूहों में या गाइड के साथ चलें। मुख्य घाट क्षेत्रों और रोशनी वाली गलियों में चिपके रहें। टॉर्च लाएं।
त्वरित सुझाव
दशाश्वमेध से आरती के बाद शुरू करें (8:30 PM)। गलियों में अस्सी तक चलें। टॉर्च लाएं। मुख्य क्षेत्रों में चिपके रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वाराणसी में रात में चलना सुरक्षित है?
मुख्य घाट क्षेत्र रात में आम तौर पर सुरक्षित हैं। रोशनी वाले क्षेत्रों में चिपके रहें।
रात में घाट कितने बजे बंद होते हैं?
घाट आधिकारिक रूप से बंद नहीं होते लेकिन रात 10 बजे के बाद गतिविधि काफी कम हो जाती है।
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