पुराने शहर का यह नंदी मंदिर एक विशाल काले पत्थर के बैल की मूर्ति के साथ पूर्व दिशा में काशी विश्वनाथ की ओर देखता है। भक्त बैल के कान में अपनी इच्छाएँ फुसफुसाते हैं, विश्वास है कि नंदी उन्हें भगवान शिव तक पहुँचाते हैं।
मुख्य बिंदु
- कान फुसफुसाने की परंपरा
कान फुसफुसाने की परंपरा
नंदी के कान में फुसफुसाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वर्षों में लाखों फुसफुसाहट की प्रार्थनाओं से मूर्ति के कान चिकने हो गए हैं, जो भक्तों और दैवीय शक्ति के बीच एक मूर्त संबंध बनाता है।
त्वरित सुझाव
• सर्वोत्तम समय: सुबह जल्दी• अवधि: 1-2 घंटे• प्रवेश: अधिकांश निःशुल्क
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दौरा करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
सुबह जल्दी सबसे अच्छा अनुभव प्रदान करता है।
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