वाराणसी भारत की कुछ महानतम संगीत प्रतिभाओं की पालना रही है। शहर की गलियां सदियों से शहनाई, सितार और तबले की ध्वनियों से गूंजती रही हैं।
मुख्य बिंदु
- किंवदंतियां
- किंवदंतियों से जुड़े स्थान
किंवदंतियां
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (1916-2006), शहनाई के महान वादक, ने अपना अधिकांश जीवन वाराणसी में बिताया।
पंडित रवि शंकर (1920-2012), सितार के महान वादक, ने वाराणसी में अपने शुरुआती वर्ष बिताए।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
शहनाई महान। भारत रत्न सम्मानित। दुमरांव में रहे, वाराणसी में काम किया।
पंडित रवि शंकर
सितार महान। ग्रैमी विजेता। भारतीय संगीत को वैश्विक श्रोताओं तक पहुंचाया।
किशन महाराज
तबला वादक। शक्तिशाली और नाटकीय बजाने की शैली के लिए प्रसिद्ध।
किंवदंतियों से जुड़े स्थान
दशाश्वमेध घाट के पास बिस्मिल्लाह खान संग्रहालय महान वादक के वाद्य, रिकॉर्डिंग और व्यक्तिगत सामान को संरक्षित करता है।
बिस्मिल्लाह खान संग्रहालय
दशाश्वमेध घाट के पास। प्रवेश Rs 20। सुबह 10 बजे - शाम 5 बजे, सोमवार बंद।
रवि शंकर फाउंडेशन
अस्सी घाट के पास। उनके जीवन और रिकॉर्डिंग की जानकारी। मुफ्त प्रवेश।
त्वरित सुझाव
दशाश्वमेध घाट के पास बिस्मिल्लाह खान संग्रहालय (Rs 20) जाएं। अस्सी घाट के पास रवि शंकर फाउंडेशन। बनारस घराने ने शहनाई, सितार और तबला की किंवदंतियां दी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मैं इन संग्रहालयों में मुफ्त में जा सकता हूं?
बिस्मिल्लाह खान संग्रहालय Rs 20 लेता है। रवि शंकर फाउंडेशन मुफ्त है। दोनों सभी आगंतुकों के लिए खुले हैं।
क्या बनारस घराने के अभी भी संगीतकार प्रदर्शन कर रहे हैं?
हां, इन किंवदंतियों के कई शिष्य प्रदर्शन जारी रखते हैं। वार्षिक संगीत उत्सव बनारस परंपरा के स्थापित और उभरते कलाकारों को प्रदर्शित करते हैं।
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