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कपड़ा परंपराएं

वाराणसी का कपड़ा उद्योग

बुनाई से लेकर अलमारी तक — दुल्हनों को सजाने वाली रेशम की विरासत।

रेशम की विरासत

वाराणसी का कपड़ा उद्योग 2,500 वर्षों से अधिक पुराना है। मुगल काल में कला अपने चरम पर पहुंच गई। आज 500,000 से अधिक परिवार हैंडलूम पर निर्भर हैं।

बनारसी कपड़ों के प्रकार

कटन (शुद्ध रेशम)

हाथ से मोड़ा गया 100% शुद्ध रेशम। सबसे प्रीमियम किस्म।

जरी ब्रोकेड

सोने या चांदी के धागे (जरी) वाला रेशम। मुगल डिजाइन।

टिश्यू और ऑर्गेंजा

हल्का, पारदर्शी कपड़ा धातु के धागों के साथ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वाराणसी का कपड़ा उद्योग कितना बड़ा है?
वाराणसी कपड़ा उद्योग में 500,000 से अधिक बुनकर काम करते हैं और वार्षिक कारोबार ₹5,000 करोड़ से अधिक है।
वाराणसी में कौन से कपड़े बनते हैं?
बनारसी रेशम की साड़ियां, ड्रेस मटेरियल, स्कार्फ और फर्निशिंग फैब्रिक।
क्या बुनाई इकाईयों का दौरा किया जा सकता है?
हां, कबीरचौरा और चौकाघाट क्षेत्र में बुनकर परिवार आगंतुकों का स्वागत करते हैं।
बनारसी रेशम की विविध गुणवत्ता क्या है?
शुद्ध रेशम (कटन), रेशम मिश्रण और कृत्रिम रेशम — ₹2,000 से ₹5,00,000+ तक।

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पारंपरिक करघों पर रेशम बुनते देखें।

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