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त्योहार गाइड

वाराणसी में करवा चौथ: पारंपरिक उपवास त्योहार

विवाहित महिलाओं के प्रिय त्योहार की भक्ति और परंपराओं का गवाह बनें

करवा चौथ की भावना

करवा चौथ उत्तर भारत के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक है, जिसमें विवाहित महिलाएं सूर्योदय से चंद्रमा दर्शन तक अपने पतियों की भलाई के लिए उपवास रखती हैं। वाराणसी में, यह त्योहार विशेष पारंपरिक चरित्र धारण करता है।

त्योहार हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने में पूर्णिमा के चौथे दिन पड़ता है, आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में।

पारंपरिक अनुष्ठान और रीति-रिवाज

दिन की शुरुआत सरगी से होती है, एक पूर्व-सुबह का भोजन जो सास द्वारा तैयार किया जाता है। पूरे दिन महिलाएं कठोर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को महिलाएं करवा चौथ पूजा के लिए एकत्रित होती हैं।

सबसे भावनात्मक क्षण चंद्रमा दर्शन के समय आता है, जब महिलाएं छलनी के माध्यम से चंद्रमा को देखकर उपवास तोड़ती हैं।

वाराणसी में करवा चौथ का अनुभव

पुराने शहर के बाजार त्योहार के दौरान गतिविधि से भरे होते हैं। सामूहिक पूजा विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जाती है। चंद्रमा दर्शन के लिए घाट खूबसूरत सेटिंग्स प्रदान करते हैं। त्योहारी माहौल और पारंपरिक उत्सव वाराणसी की परंपराओं में झांकने का अवसर प्रदान करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ क्या है?
करवा चौथ एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु और समृद्धि के लिए सूर्योदय से चंद्रमा दर्शन तक उपवास रखती हैं। यह कार्तिक माह (अक्टूबर-नवंबर) में पूर्णिमा के चौथे दिन पड़ता है।
वाराणसी में करवा चौथ कैसे मनाया जाता है?
महिलाएं पूरे दिन कठोर निर्जला व्रत रखती हैं, मेंहदी लगाती हैं, पारंपरिक पोशाक पहनती हैं और शाम को सामूहिक पूजा में भाग लेती हैं। चंद्रमा दर्शन के बाद उपवास तोड़ा जाता है।

वाराणसी में करवा चौथ का अनुभव करें

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