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बरसात में कैसे बचें
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बरसात में कैसे बचें

डूबी गलियां, रद्द नावें और मानसून का जादू

जुलाई से सितंबर — क्या बदलता है, क्या रखें, क्या छोड़ें

वाराणसी का मानसून (जुलाई-सितंबर) भारी बारिश, डूबे घाट और सबसे नाटकीय आसमान लाता है। भारी बारिश में नावें रद्द हो सकती हैं। फायदा: कम पर्यटक और हरा-भरा माहौल।

क्या बदलता है

डूबे घाट

निचली सीढ़ियां पानी में। ऊपरी सीढ़ियों पर रहें।

नाव रद्द

भारी बारिश = नाव नहीं। निकलने से पहले नाव वाले से पूछें।

कीचड़ भरी गलियां

पुराने शहर की गलियां कीचड़ और फिसलन भरी। वॉटरप्रूफ जूते।

विस्तारित आरती

गंगा आरती बारिश या धूप में छत्र के नीचे चलती है।

क्या रखें

रेन जैकेट

ज़रूरी। हवा में छाते बेकार।

वॉटरप्रूफ बैग

फोन, वॉलेट, पासपोर्ट के लिए।

वॉटरप्रूफ जूते

घाट सैर के लिए ज़रूरी।

मच्छर रिपेलेंट

मानसून = मच्छरों का चरम।

क्या छोड़ें

रात में बारिश हो तो सूर्योदय नाव छोड़ें — नदी खराब हो जाती है। निचली सीढ़ियां छोड़ें — डूबी होती हैं। मंदिर, कैफे और इनडोर शो पर ध्यान दें।

एक नज़र में

  • जुलाई-सितंबर मानसून।
  • घाट सीढ़ियां डूबी — ऊपरी पर रहें।
  • नावें रद्द हो सकती हैं।
  • रेन जैकेट और वॉटरप्रूफ बैग।
  • कम पर्यटक, नाटकीय आसमान।

तुरंत जवाब

क्या मानसून में वाराणसी जाना चाहिए?

सिर्फ अगर बारिश पसंद हो और गलियों कीचड़ से फर्क न पड़े। फायदा: नाटकीय आसमान, कम पर्यटक।

क्या बारिश में नाव चलती हैं?

हल्की बारिश में हाँ। भारी बारिश में नहीं। रात में नाव वाले से पूछें।

मानसून में चलना सुरक्षित?

मुख्य गलियां ठीक। खराब निकासी वाली संकरी गलियों से बचें। वॉटरप्रूफ जूते।

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