वाराणसी में होली एक सप्ताह तक चलने वाला उत्सव है जो प्राचीन शहर को रंगों की कैनवस में बदल देता है।
मुख्य बिंदु
- वाराणसी की अनूठी होली परंपराएं
- होली का भोजन और पेय
- होली खेलने के लिए सुझाव
वाराणसी की अनूठी होली परंपराएं
वाराणसी की सबसे प्रसिद्ध होली संकट मोचन मंदिर में सम्राट होली है।
वाराणसी की एक अनूठी परंपरा मटकी फोड़ (पतीला तोड़ने) की रस्म है।
संकट मोचन होली
होली से एक सप्ताह पहले शुरू। मंदिर के प्रांगण में रंग, संगीत और ठंडाई।
मटकी फोड़
टीमें घाटों पर लटकी छाछ की मटकी तोड़ने की प्रतिस्पर्धा करती हैं।
लठमार होली
निकटवर्ती बरसाना और नंदगांव लठों से मनाते हैं। वाराणसी से दिन भर की यात्रा।
होली का भोजन और पेय
वाराणसी में बिना ठंडाई के होली उत्सव अधूरा है।
ठंडाई
दशाश्वमेध घाट के पास की दुकानों पर आजमाएं। Rs 30-80 प्रति गिलास।
गुजिया
खोया और सूखे मेवों से भरी मीठी पकौड़ी। हर जगह उपलब्ध।
भांग ठंडाई
केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर उपलब्ध। जिम्मेदारी से सेवन करें।
होली खेलने के लिए सुझाव
पुराने कपड़े पहनें जो रंग लगने से कोई फर्क न पड़े।
सुरक्षा सुझाव
त्वचा और बालों पर नारियल तेल लगाएं। धूप का चश्मा पहनें। केवल जैविक रंगों का उपयोग करें।
सर्वोत्तम क्षेत्र
पर्यटकों के लिए अस्सी घाट क्षेत्र। पुराने शहर के लिए विश्वनाथ गली।
त्वरित सुझाव
वाराणसी की होली एक सप्ताह तक चलती है। संकट मोचन मंदिर में सबसे बड़ा जश्न। ठंडाई और गुजिया आजमाएं। पुराने कपड़े पहनें। जैविक रंगों का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी में होली कब शुरू होती है?
होली उत्सव मुख्य दिन से लगभग एक सप्ताह पहले शुरू होते हैं। मुख्य रंग खेल फाल्गुन पूर्णिमा (मार्च) को होता है।
क्या यह महिला पर्यटकों के लिए सुरक्षित है?
समूह में खेलें और अस्सी घाट जैसे भीड़ वाले क्षेत्रों में रहें। अकेली गलियों से बचें।
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