वाराणसी की कैफ़े संस्कृति नदी से अविभाज्य है। घाट प्राकृतिक खुले-वायु कैफ़े के रूप में काम करते हैं जहाँ चाय वाले ताज़ी चाय बनाते हैं।
मुख्य बिंदु
- घाट-सीढ़ी चाय संस्कृति
- नदी किनारे छत कैफ़े
- चाय वाला अनुभव
- कैफ़े शिष्टाचार
घाट-सीढ़ी चाय संस्कृति
वाराणसी की सबसे पुरानी कैफ़े परंपरा घाट की सीढ़ियों पर चाय है। चाय वाले छोटे चूल्हे लगाते हैं और मिट्टी के कुल्हड़ में मसाला चाय परोसते हैं।
नदी किनारे छत कैफ़े
अस्सी घाट में गंगा दृश्य वाले छत कैफ़े की सबसे अधिक सांद्रता है। इटैलियन कॉफ़ी से लेकर ताज़े फलों के रस और पारंपरिक लस्सी तक सब कुछ परोसते हैं।
सुबह की कॉफ़ी
ताज़ी पेय के साथ गंगा पर सूर्योदय देखें। कई कैफ़े इस उद्देश्य के लिए सुबह 6 बजे खुलते हैं।
आरती दृश्य के साथ शाम की चाय
छत से गंगा आरती देखते हुए चाय की चुस्की लें। फ्रंट-रो आध्यात्मिक अनुभव।
चाय वाला अनुभव
सबसे प्रामाणिक अनुभव के लिए, चाय वाले के साथ घाट की सीढ़ियों पर बैठें। कुल्हड़ में मसाला चाय ऑर्डर करें। शहर का जीवन देखें।
कैफ़े शिष्टाचार
अपना पेय आनंद लेते हुए घाटों की पवित्रता का सम्मान करें। कूड़ा फेंकें नहीं। चाय वालों को उदारता से टिप दें।
त्वरित सुझाव
सर्वोत्तम क्षेत्र: छत कैफ़े के लिए अस्सी घाट। घाट की सीढ़ियों पर कुल्हड़ में चाय आज़माएं। सूर्योदय दृश्यों के लिए सुबह की कॉफ़ी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घाटों पर चाय की कीमत कितनी है?
घाट की सीढ़ियों पर चाय ₹10-30 है। छत कैफ़े की चाय और कॉफ़ी ₹50-200 की सीमा में है।
क्या घाट कैफ़े साल भर खुले हैं?
घाट चाय वाले साल भर काम करते हैं। छत कैफ़े मानसून के दौरान कम घंटे रख सकते हैं।
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