नाग नाथैया वाराणसी की सबसे भव्य और अनूठी परंपराओं में से एक है, जो छठ पूजा (नवंबर) के अंतिम दिन प्रस्तुत की जाती है।
मुख्य बिंदु
- नाग नाथैया के पीछे की कथा
- प्रदर्शन
नाग नाथैया के पीछे की कथा
परंपरा भगवान कृष्ण द्वारा यमुना नदी में नाग कालिय को वश में करने की कथा पर आधारित है।
कब
छठ पूजा का अंतिम दिन (नवंबर)। आमतौर पर दोपहर बाद।
कहां
गंगा का राजघाट क्षेत्र। घाट से मुफ्त दर्शन।
प्रदर्शन
नदी में लगभग 40-50 फीट ऊंचा बांस का खंभा स्थापित किया जाता है। प्रदर्शनकारी, आमतौर पर एक युवा लड़का, शीर्ष पर चढ़ता है।
भीड़ आश्चर्य से देखती है जब युवा प्रदर्शनकारी हिलते खंभे पर संतुलन बनाए रखता है।
ऊंचाई
पानी से 40-50 फीट ऊपर। खंभा धारा में हिलता है।
अवधि
30-45 मिनट। गंगा में नाटकीय गोता के साथ समापन।
त्वरित सुझाव
नाग नाथैया छठ पूजा के अंतिम दिन (नवंबर) राजघाट पर होता है। देखना मुफ्त। प्रदर्शनकारी गंगा में 40-50 फीट के बांस के खंभे पर संतुलन बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या प्रदर्शनकारी खतरे में है?
प्रदर्शनकारी बचपन से प्रशिक्षित होते हैं और कुशल एक्रोबैट होते हैं। सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।
क्या मैं नाव से यह देख सकता हूं?
हां, नाव किराए पर लेने (Rs 100-200) से नदी से प्रदर्शन का निकटतम दृश्य मिलता है।
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