मकर संक्रांति (14 जनवरी) सूर्य की उत्तरायण यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। वाराणसी में, इस फसल उत्सव को भोर में गंगा में पवित्र स्नान से मनाया जाता है।
मुख्य बिंदु
- वाराणसी कैसे मनाता है
- संक्रांति अनुभव के लिए सर्वोत्तम स्थान
वाराणसी कैसे मनाता है
दिन हजारों भक्तों द्वारा भोर से पहले गंगा में स्नान से शुरू होता है।
तिल-गुड़ (तिल और गुड़ की मिठाई) का आदान-प्रदान उत्सव का अनिवार्य हिस्सा है।
भोर का स्नान
सुबह 4:00 बजे - 8:00 बजे सभी प्रमुख घाटों पर। मुफ्त।
तिल-गुड़ वितरण
मंदिर और सामुदायिक केंद्र मुफ्त तिल-गुड़ प्रसाद बांटते हैं।
पतंग उड़ाना
दोपहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा। छत पर जश्न।
संक्रांति अनुभव के लिए सर्वोत्तम स्थान
दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पवित्र स्नान के लिए सबसे लोकप्रिय स्थान हैं। पतंग उड़ाने के लिए, अस्सी घाट के पास होटलों की छतों पर जाएं।
दशाश्वमेध घाट
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामूहिक स्नान के साथ सबसे भव्य जश्न।
अस्सी घाट
शांत माहौल। फोटोग्राफी के लिए अच्छा।
त्वरित सुझाव
मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। भोर में गंगा में स्नान करें। तिल-गुड़ बांटें। दोपहर में पतंग उड़ाएं। दशाश्वमेध घाट पर सबसे भव्य जश्न।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान विशेष क्यों है?
मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से इस दिन गंगा का जल विशेष रूप से शुद्धकारी होता है।
क्या मैं वाराणसी में पतंग उड़ा सकता हूं?
हां, पतंग उड़ाना संक्रांति उत्सव का प्रमुख हिस्सा है। कई होटल छत पर पतंग उड़ाने के कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
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