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वाराणसी में हनुमान जयंती: बजरंगबली का जन्म

फ़ोटो: Unsplash

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seasonal 6 min अपडेट: 24 अगस्त 2026

वाराणसी में हनुमान जयंती: बजरंगबली का जन्म

भगवान राम के समर्पित सेवक का उत्सव

वाराणसी में भव्य हनुमान जयंती समारोहों का अनुभव करें, सजाए गए मंदिरों, विशेष प्रार्थनाओं और भक्ति के जीवंत वातावरण के साथ।

हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्म का उत्सव है, जो भगवान राम के समर्पित शिष्य और शक्ति, साहस तथा अटूट निष्ठा के प्रतीक हैं। वाराणसी में यह त्योहार बजरंगबली को समर्पित मंदिरों में हजारों भक्तों को एक साथ लाता है, जो आनंद और श्रद्धा का वातावरण बनाता है।

मुख्य बिंदु

  • हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?
  • वाराणसी कैसे मनाता है
  • विशेष परंपराएं

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (चैत्र माह की पूर्णिमा, मार्च-अप्रैल) को पड़ती है। परंपरा के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म इसी दिन सूर्योदय के समय हुआ था। वाराणसी में समारोह सुबह जल्दी शुरू होते हैं और दिन भर जारी रहते हैं।

वाराणसी कैसे मनाता है

वाराणसी भर के हनुमान मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। विशेष पूजाएं होती हैं, और दिन भर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। कई भक्त हनुमान मूर्तियों पर सिंदूर लगाते हैं क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।

हनुमान घाट

भगवान हनुमान के नाम पर बना यह घाट समारोहों का केंद्र है। यहां विशेष प्रार्थनाएं और आरती समारोह होते हैं, जो भक्तों की बड़ी भीड़ खींचते हैं।

सिंदूर अर्पण

भक्त हनुमान मूर्तियों को सिंदूर अर्पित करते हैं, यह विश्वास करते हुए कि यह शक्ति और सुरक्षा लाता है। यह अनुष्ठान बड़ी भक्ति और धूमधाम के साथ किया जाता है।

विशेष परंपराएं

हनुमान चालीसा का पाठ समारोहों का मुख्य आकर्षण है। कई मंदिर मैराथन पाठ आयोजित करते हैं जहां 40 छंदों का भजन निरंतर पढ़ा जाता है। भक्त प्रसाद वितरित करते हैं और सामुदायिक भोज का आयोजन करते हैं।

त्वरित सुझाव

वाराणसी में हनुमान जयंती सजाए गए मंदिरों, हनुमान चालीसा के पाठ और सिंदूर अर्पण के साथ भगवान हनुमान के जन्म का उत्सव मनाती है। यह मार्च-अप्रैल में पड़ती है और पूरे शहर के हनुमान मंदिरों में विशेष पूजाएं होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जयंती पर हनुमान मंदिरों में जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह जल्दी (सूर्योदय के आसपास) सबसे शुभ समय माना जाता है। हालांकि, समारोह दिन भर जारी रहते हैं, इसलिए कोई भी समय यात्रा के लिए उपयुक्त है।

क्या महिलाएं भी हनुमान मूर्तियों पर सिंदूर लगा सकती हैं?

हां, महिलाएं हनुमान मूर्तियों पर सिंदूर लगा सकती हैं। इस शुभ अनुष्ठान के लिए लिंग के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं है। सभी पृष्ठभूमि के भक्त समान भक्ति के साथ भाग लेते हैं।

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