गंगा दशहरा, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (मई-जून) को मनाया जाता है, उस दिन का प्रतीक है जब पवित्र गंगा भगवान शिव की जटाओं से होकर स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी।
मुख्य बिंदु
- महत्व
- वाराणसी कैसे मनाता है
- पर्यटकों के लिए सुझाव
महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा को राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्माओं को शुद्ध करने के लिए पृथ्वी पर लाया था।
नाम में "दशहरा" हिमालय से बहने वाली नदी के दस पहलुओं (दशा) को दर्शाता है।
तिथि
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (मई-जून)।
मुख्य अनुष्ठान
भोर में गंगा में पवित्र स्नान, इसके बाद शाम को भव्य आरती।
वाराणसी कैसे मनाता है
दिन हजारों भक्तों द्वारा सूर्योदय से पहले गंगा में पवित्र स्नान के साथ शुरू होता है।
इस अवसर पर दशाश्वमेध घाट पर शाम की आरती विशेष भव्य होती है।
भोर का स्नान
सुबह 4:00 बजे - 7:00 बजे। हजारों गंगा में स्नान करते हैं। पुजारी विशेष प्रार्थना करते हैं।
शाम की आरती
दशाश्वमेध घाट पर भव्य आरती। विशेष सजावट और विस्तारित प्रदर्शन।
मंदिर पूजा
सभी गंगा-मुखी मंदिरों में विशेष पूजा। काशी विश्वनाथ में विस्तारित दर्शन समय।
पर्यटकों के लिए सुझाव
भाग लेना चाहते हैं तो भोर के स्नान अनुभव के लिए जल्दी पहुंचें।
कपड़े
पवित्र स्नान के लिए कपड़े बदलकर लाएं। कीमती सामान के लिए वाटरप्रूफ बैग।
सुरक्षा
घाट फिसलन भरे हो सकते हैं। पानी में उतरते समय रेलिंग पकड़ें।
त्वरित सुझाव
गंगा दशहरा मई-जून में है। भोर 4 बजे से स्नान। दशाश्वमेध पर भव्य शाम की आरती। दोनों कार्यक्रमों के लिए जल्दी पहुंचें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा दशहरा और गंगा महोत्सव में क्या अंतर है?
गंगा दशहरा गंगा के अवतरण का एक दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान है। गंगा महोत्सव नवंबर में दशाश्वमेध घाट पर आयोजित बहु-दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव है।
क्या इस दिन गंगा में स्नान करना सुरक्षित है?
घाटों पर कर्तव्य पर लाइफगार्ड के साथ सुरक्षित स्नान क्षेत्र हैं। निर्दिष्ट स्नान घाटों पर ही रहें।
यह लेख पसंद आया?
नवीनतम वाराणसी यात्रा टिप्स अपने इनबॉक्स में प्राप्त करें।