दशाश्वमेध घाट पर शाम की गंगा आरती गंगा के तट पर रोजाना किया जाने वाला आग, प्रार्थना और भक्ति का सांस्कृतिक अनुष्ठान है।
मुख्य बिंदु
- इतिहास और महत्व
- समय और कार्यक्रम
- सर्वोत्तम दृश्य स्थान
- आरती के दौरान क्या होता है
इतिहास और महत्व
दशाश्वमेध पर गंगा आरती सदियों से की जाती रही है। विस्तृत अनुष्ठान में पांच बड़े पीतल के दीपक, अग्नि अर्पण, शंख, घंटियाँ और संस्कृत स्तोत्र शामिल हैं।
समय और कार्यक्रम
आरती रोजाना सूर्यास्त से 45 मिनट पहले शुरू होती है, सर्दियों में शाम 6:00-6:30 बजे और गर्मियों में शाम 6:45-7:15 बजे। समारोह लगभग 45 मिनट तक चलता है।
सर्वोत्तम दृश्य स्थान
घाट के कई स्तर हैं। मुख्य मंदिर के पास ऊपरी स्तर जल्दी भर जाता है। मध्य सीढ़ियाँ सबसे अच्छा संतुलन देती हैं।
आरती के दौरान क्या होता है
केसर और सफेद में सजे सात पुजारी बड़े बहु-स्तरीय पीतल के दीपकों के साथ समन्वित अनुष्ठान करते हैं। चरमोत्कर्ष तब आता है जब सभी पुजारी एक साथ दीपक उठाते हैं।
आगंतुकों के लिए शिष्टाचार
घाट पर चढ़ने से पहले जूते उतारें। कंधों और घुटनों को ढककर विनम्रता से कपड़े पहनें। फ्लैश से बचें।
त्वरित सुझाव
रोजाना सूर्यास्त से 45 मिनट पहले। 30-45 मिनट पहले पहुँचें। सर्वोत्तम स्थान: मध्य घाट की सीढ़ियाँ। जूते उतारें, विनम्रता से कपड़े पहनें। अवधि: ~45 मिनट।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या गंगा आरती में भाग लेना मुफ्त है?
हाँ, पूरी तरह मुफ्त और सभी के लिए खुली है। कुछ ऑपरेटर नावों पर भुगतान VIP बैठने प्रदान करते हैं।
क्या आरती हर दिन की जाती है?
हाँ, साल के हर दिन बिना किसी अपवाद के, मानसून और त्योहारों सहित।
क्या मैं आरती में भाग ले सकता हूँ?
आगंतुक निर्दिष्ट क्षेत्रों से निरीक्षण कर सकते हैं। सक्रिय भागीदारी पुजारियों और स्थानीय भक्तों तक सीमित है।
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